कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखवाने के लिए प्रभारी मंत्री ने निभाई जिम्मेदारी, कुछ कही अपनी कुछ सुनी सबकी

बैठक में छाये रहे ये मुद्दे

-सामुदायिक शौचालयों का बेहतर रख-रखाव तथा स्वच्छता की जाए सुनिश्चित, अधिकारी करें औचक निरीक्षण

-गोशालाओं को बनाया जाए आत्मनिर्भर, गोउत्पादों के उपयोग हेतु आमजन को करें प्रेरित

-सभी विभागों को गोशाला में निर्मित उत्पादों का प्राथमिकता से उपयोग करने के दिए निर्देश

-ऑपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत अवशेष विद्यालयों में सहयोग करें जनप्रतिनिधि

-सार्वजनिक शौचालयों में स्वच्छता एवं हाईजीन का हो पालन

-ओवरलोड, ओवरस्पीड, बिना नम्बर प्लेट, बिना माइनिंग टैग के खनिज वाहनों पर जारी रखी जाए सख्ती

-एक गाय एक परिवार को पालती है, इसकी महत्ता को समझें

-जनपद एवं नदियों को अतिक्रमणमुक्त बनाने के लिए बनाएं बेहतर रणनीति

-जिला पंचायत अपने अधिकार वाले क्षेत्रों में अवैध कालोनियों पर करें कार्यवाही, सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित होने पर ही दें एनओसी
सहारनपुर। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग तथा प्रभारी मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने सर्किट हाउस सभागार में विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा ली।
सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के स्वच्छ भारत मिशन के संकल्प के अन्तर्गत सुनिश्चित किया जाए कि सभी सामुदायिक शौचालयों का रख रखाव बेहतर ढंग से हो। उन्होने कहा कि सामुदायिक शौचालयों में साफ-सफाई एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सामुदायिक शौचालयों का औचक निरीक्षण किया जाए। इसके साथ ही यूरिनल की साफ-सफाई प्रतिदिन की जाए। ऑपरेशन कायाकल्प में शेष विद्यालयों में कार्य कराने के लिए जनप्रतिनिधियों से सहयोग के लिए कहा।
गो आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाया जाए। इस संबंध में वर्मी कम्पोस्ट, पूजा के समय उपयोग में आने वाले उपले, गोपेन्ट, गोनाइल के साथ ही गो काष्ठ का उपयोग अन्त्येष्ठि स्थल पर हो सके इसके लिए आमजनों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होने नगर आयुक्त को नगर के अन्त्येष्ठि स्थलों में संचालित समिति से वार्ता करने एवं बेहतर रणनीति बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि एक गाय एक परिवार को पालने का काम करती है। इसकी महत्ता को समझना चाहिए।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सरकारी विद्यालयों में गोबर से बने प्राकृतिक पंेट का इस्तेमाल किया जाए। इसके अनेकों लाभ है तथा यह पर्यावरण अनुकूल है। उन्होने सभी विभागों को गोशाला में निर्मित उत्पादों का प्राथमिकता से उपयोग करने के निर्देश दिए। जिला पंचायत राज अधिकारी को शौचालयों में स्वच्छता के लिए गोशाला में निर्मित गोनाइल के उपयोग करने को कहा। इस संबंध में उन्होने नगर निगम की कान्हा उपवन गोशाला की प्रशंसा की।
ओवरलोडिंग, ओवरस्पीड, बिना नम्बर प्लेट, बिना माईनिंग टैग के खनन स्वीकार्य नहीं होगा। जनपद में अवैध खनन पर सख्ती की जाए। इस संबंध में जिलाधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि प्रवर्तन कार्यवाही बढाई गयी है तथा चैकपोस्ट भी बनाए गये है।
यातायात व्यवस्था को सुदृढ करने एवं सड़क सुरक्षा के तहत जिलाधिकारी ने बताया कि एक सेल बनाकर सभी संबंधित विभागों को कार्य करने के निर्देश दिए गये है ताकि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित रहे। साथ ही सड़क सुरक्षा को बेहतर किया जा सके। जिलाधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि चालान में वसूली का कार्य शीघ्रता से किए जाने के संबंध में प्रशासन, पुलिस एवं यातायात संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं जिससे राजस्व की वसूली भी की जा रही है।
अतिक्रमण न हो इसके लिए एक बेहतर योजना बनाई जाए। नगर निगम इस संबंध में प्राथमिकता से कार्य करे। नदियों में अतिक्रमण न हो। इस संबंध में भी सभी विभागों के अधिकारी समन्वय स्थापित करते हुए कार्ययोजना बनाएं।
जिला पंचायत अपने अधिकार वाले क्षेत्रों में अवैध कालोनियों पर कार्यवाही करे। उनको नोटिस भेजे जाएं और कार्यवाही की जाए। कालोनी काटते समय अपू्रवल लें। उन्होने अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को निर्देश दिए कि कालोनियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र तभी दिया जाए जब यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि समस्त मूलभूत व्यवस्थाएं कर ली गयी है। इस संबंध में यदि आवश्यकता हो तो बोर्ड बैठक के तहत कालोनियों के विकास के दृष्टिगत नियम बनाना भी सुनिश्चित किया जाए।
युवा कल्याण अधिकारी के बैठक में उपस्थित न होने पर नाराजगी व्यक्त की।
बैठक के उपरान्त प्रभारी मंत्री ने विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए मिशन (ग्रामीण) के तहत विकसित भारत- जी राम जी (गारण्टी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन ग्रामीण) के संबंध में जनजागरण अभियान के तहत मीडिया को जानकारी दी।
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने प्रभारी मंत्री को विकास कार्यों एवं जनपद में किये गये बेहतर कार्यों के संबंध में जानकारी दी। उन्होने आशवस्त किया कि आपके द्वारा दिए गये निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी ने कानून व्यवस्था एवं यातायात व्यवस्था संबंधी जानकारी से प्रभारी मंत्री को अवगत कराया।
बैठक में ये भी रहे शामिल
इस अवसर पर राज्यमंत्री लोक निर्माण विभाग बृजेश सिंह, महापौर डॉ0 अजय सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी, विधायक नकुड मुकेश चौधरी, विधायक रामपुर मनिहारान देवेन्द्र निम, विधायक गंगोह किरत सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा महेन्द्र सैनी, नगर आयुक्त शिपू गिरी, मुख्य विकास अधिकारी सुमित राजेश महाजन, अपर जिलाधिकारी प्रशासन संतोष बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व सलिल कुमार पटेल, महानगर अध्यक्ष भाजपा शीतल विश्नोई सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।

Land For Job Case: लैंड फॉर जॉब केस मेंकोर्ट की बड़ी टिपण्णी, लालू परिवार समेत 41 पर चलेगा मुकदमा

लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार समेत 41 पर आरोप तय

Land For Job Case: लालू परिवार को बड़ा झटका लगा. आज शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लैंड फॉर जॉब केस के मामले में सुनवाई हुई. जिसके बाद लालू परिवार समेत 41 लोगों पर आरोप तय कर दिया गया है. अब इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती समेत 41 लोगों पर मुकदमा चलेगा.

52 लोग बरी

दरअसल, आज आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव, बेटी मीसा भारती और तेज प्रताप यादव दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पहुंचे थे. कोर्ट के सामने सबूत पेश किए गए, जिसके बाद उसे सही पाए जाने पर लालू परिवार समेत 41 लोगों पर आरोप तय कर लिया गया. सभी 41 आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13 (2) और 13 (1) (d) के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है. इसके साथ ही 52 लोगों को बरी भी किया गया है. ऐसे में अब लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती है. मालूम हो, यह मामला सीबीआई की तरफ से दर्ज किया गया है.

क्या कुछ कहा गया?

राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने कहा था कि लालू यादव और उनका पूरा परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहे थे. उनकी तरफ से एक बड़ी साजिश रची गई थी. इसके बाद जज की तरफ से आदेश दिया गया कि लालू यादव ने अपने परिवार के लिए अचल संपत्ति पाने के लिए सरकारी नौकरी की सौदेबाजी की. इसे ही हथियार बनाते हुए बड़ी साजिश रची गई. ऐसे में अब 41 लोगों पर ट्रायल चलेगा.

क्या है लैंड फॉर जॉब केस?

यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे. सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दायर करते हुए आरोप लगाया था कि रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने जमीन के बदले नौकरियां दीं, यानी जिन उम्मीदवारों को रेलवे में नौकरी दी गई, उनके परिवारों ने बदले में अपनी जमीन लालू परिवार या उससे जुड़े लोगों के नाम की.

सीबीआई के अनुसार, इस दौरान रेलवे में नौकरी देने के नाम पर बिहार और झारखंड के कई लोगों से जमीन ली गई. इस मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव समेत कई लोगों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए.

ट्रंप के रवैये से रूस, चीन का हौसला बढ़ेगा, पढ़ें राजन कुमार का आलेख

इक्कीसवीं सदी में ट्रंप प्रशासन बढ़ते चीनी और रूसी प्रभाव को रोकना चाहता है. पूरे पश्चिमी गोलार्ध को, जो उत्तर में कनाडा और ग्रीनलैंड से लेकर मध्य में कैरेबियन सागर और सुदूर दक्षिण में अर्जेंटीना तक फैला है, ट्रंप प्रशासन अपने लिए आसान मानता है, लेकिन वेनेजुएला में ट्रंप की कार्रवाई से पुतिन और जिनपिंग का हौसला ही बढ़ेगा. यदि सबसे शक्तिशाली देश ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ की नीति अपनाता है, तो क्षेत्रीय क्षत्रपों को ऐसा करने से भला कौन रोक सकता है?

राजन कुमार

Trump: अमेरिकी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए ट्रंप प्रशासन द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ कर अमेरिका लाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. इसने वैश्विक नेताओं के बीच भय, पीड़ा और बेबसी की भावना पैदा कर दी है. नैतिकता की सभी सीमाओं को पार करते हुए ट्रंप ने घोषणा की कि वेनेजुएला में भारी मात्रा में तेल और दुर्लभ खनिज मौजूद हैं, और वह उन संसाधनों का दोहन करने के लिए अमेरिकी कंपनियों को भेजेंगे. यदि ट्रंप को नहीं रोका गया, तो वेनेजुएला उनकी साम्राज्यवादी योजनाओं का पहला कदम साबित हो सकता है. ट्रंप ने बार-बार डेनमार्क से ग्रीनलैंड छीनने की इच्छा जाहिर की है. उनकी टीम ने, जिसमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ शामिल हैं, बार-बार कहा है कि मादुरो की गिरफ्तारी से क्यूबा में सत्ता का पतन आसान हो जायेगा. क्यूबा, मेक्सिको और कोलंबिया भी जबरदस्ती की कार्रवाई के अगले शिकार हो सकते हैं. ट्रंप के पास गाजा के लिए भी योजनाएं हैं. ये खतरे वास्तविक हैं और इन्हें ‘पागल के सपने’ कहकर खारिज करना घातक साबित हो सकता है.

ट्रंप एक साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा वाले व्यक्ति हैं. वह रूढ़िवादी विचारधारा वाले ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ आंदोलन का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अमेरिका के वैश्विक प्रभाव में तेजी से हो रही गिरावट से नाराज है और उसके पुराने गौरव को पुनः स्थापित करना चाहता है. यह एक ऐसे राष्ट्रवाद का प्रचार करता है, जो नस्लवाद, सैन्य दुस्साहस और क्षेत्रीय विस्तारवाद को बढ़ावा देने में संकोच नहीं करता. ट्रंप के लिए कानून, नियम और नैतिकता कोई मायने नहीं रखते. आखिरकार, ट्रंप की रणनीति क्या है और वह क्या हासिल करना चाहते हैं? ट्रंप का मानना है कि अमेरिका का वाणिज्यिक और भू-राजनीतिक प्रभाव तेजी से घट रहा है. उनके मुताबिक, उदार व्यापार व्यवस्था से चीन को फायदा हुआ है और अमेरिका खोखला हो गया है.

ट्रंप 19वीं सदी के अमेरिका से प्रभावित प्रतीत होते हैं. मादुरो की गिरफ्तारी के तुरंत बाद मार-ए-लागो में दिये गये भाषण में उन्होंने अपनी नीति को 1823 के मोनरो सिद्धांत के पुनरुद्धार के रूप में प्रस्तुत किया. उस सिद्धांत का उद्देश्य लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों में यूरोपीय हस्तक्षेप को रोककर पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी वर्चस्व स्थापित करना था. इक्कीसवीं सदी में ट्रंप प्रशासन यूरोपीय प्रभाव को नहीं, बल्कि बढ़ते चीनी और रूसी प्रभाव को रोकना चाहता है. पूरे पश्चिमी गोलार्ध को, जो उत्तर में कनाडा और ग्रीनलैंड से लेकर मध्य में कैरेबियन सागर और सुदूर दक्षिण में अर्जेंटीना तक फैला है, ट्रंप प्रशासन अपने लिए आसान मानता है.

हमारे सामने इस विषय से संबंधित तीन महत्वपूर्ण प्रश्न हैं : क्या ट्रंप अपनी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं में सफल होंगे? चीन इस तरह के हथकंडों पर क्या प्रतिक्रिया देगा? और भारत के लिए क्या जटिलताएं होंगी? वाशिंगटन ने भले ही मादुरो को सत्ता से बेदखल कर दिया हो, पर वेनेजुएला पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना अब भी एक दूर का सपना है. ट्रंप की एकमात्र रुचि वेनेजुएला के संसाधनों पर कब्जे की है, न कि राजनीतिक स्थिरता या लोकतंत्र की स्थापना में. ट्रंप की यह योजना पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ावा दे सकती है. ब्राजील को छोड़कर लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के अधिकांश देश छोटे हैं और अमेरिकी शक्ति के सामने कमजोर हैं. पर अतीत में अमेरिका द्वारा कई सरकारों को गिराने के प्रयासों के कारण इस क्षेत्र में अमेरिका विरोधी भावना बहुत प्रबल है. ट्रंप का वेनेजुएला अभियान पनामा में चलाये गये एक अभियान के समान था, जहां 36 वर्ष पहले मैनुअल नोरीगा को अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा था. उससे पहले 1954 में ग्वाटेमाला के निर्वाचित राष्ट्रपति जैकोबो अर्बेंज गुजमैन को अमेरिकी समर्थित स्थानीय लड़ाकों ने सत्ता से हटा दिया था.

वर्ष 1961 में राष्ट्रपति कैनेडी ने क्यूबा में फिदेल कास्त्रो को उखाड़ फेंकने के लिए बे ऑफ पिग्स आक्रमण की योजना बनायी थी. हालांकि, वह आक्रमण विफल रहा था. ब्राजील में, अमेरिकी सीआइए ने 1964 में एक सैन्य तख्तापलट का समर्थन किया और 1985 तक अमेरिका समर्थक तानाशाही कायम रही. वर्ष 1973 में अमेरिका ने लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित चिली के राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंदे को सत्ता से हटा दिया था. उनके उत्तराधिकारी, जनरल ऑगस्टो पिनोशे ने एक दमनकारी दक्षिणपंथी शासन का नेतृत्व किया. संक्षेप में, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन में अमेरिकी राजनीतिक व सैन्य हस्तक्षेपों का लंबा इतिहास रहा है, हालांकि इसकी सफलता दर बहुत कम है. ट्रंप के हस्तक्षेप कुछ हद तक इराक, लीबिया, सीरिया, अफगानिस्तान और गाजा जैसी स्थितियों के समान हो सकते हैं, जिनसे राजनीतिक व सामाजिक अराजकता पैदा हुई. ट्रंप द्वारा मादुरो को सत्ता से हटाने को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन नहीं मिल रहा. इटली और कुछ अन्य कठपुतली देशों को छोड़ किसी बड़े देश ने इसका समर्थन नहीं किया है. यहां तक कि नाटो देश भी ट्रंप के कदम से नाराज और चिंतित हैं.

वेनेजुएला में ट्रंप की कार्रवाई से पुतिन और जिनपिंग का हौसला बढ़ेगा. यदि सबसे शक्तिशाली देश ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ की नीति अपनाता है, तो क्षेत्रीय क्षत्रपों को ऐसा करने से कौन रोक सकता है? वास्तव में, दुनिया अति राष्ट्रवाद, क्षेत्रीय विस्तारवाद और गिरोह पूंजीवाद से ग्रस्त एक खतरनाक दौर में प्रवेश कर रही है. वैश्विक स्तर पर अपनी प्रभुत्वशाली स्थिति बनाये रखने में असमर्थ अमेरिका एक क्षेत्रीय शक्ति की तरह व्यवहार कर रहा है, जहां वह क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता तो जता रहा है, पर वैश्विक स्तर पर अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट रहा है. इन परिस्थितियों में भारत को किस प्रकार की नीति अपनानी चाहिए? नयी दिल्ली का रवैया बहुत कूटनीतिक और सतर्क है.

टैरिफ पर चल रही व्यापार वार्ता को देखते हुए वह ट्रंप प्रशासन को नाराज नहीं करना चाहती. इसलिए, यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस की निंदा न करने की तरह भारत अमेरिका की निंदा नहीं करेगा. भारत के लिए वेनेजुएला बहुत दूर का देश है और अमेरिका से टकराव मोल लेना यथोचित नहीं है. हालांकि, उसे यह समझना होगा कि यदि वह संकट के समय वैश्विक दक्षिण के देशों का साथ नहीं देता है, तो वे चीन की ओर रुख करेंगे. यह वैश्विक दक्षिण में नेतृत्व की उसकी महत्वाकांक्षा के लिए अच्छा नहीं है. ट्रंप किसी के हितैषी नहीं हैं और जरूरत पड़ने पर भारत का इस्तेमाल करेंगे, और जब कोई लाभ नहीं होगा, तो दरकिनार कर देंगे. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)