UGC New Regulations : यूजीसी पर सुप्रीम रोक, जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट, जानें पूरी बात



UGC New Regulations : यूजीसी के नए नियम में समर्थन और विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने आज रोक लगा दी. इतना ही नहीं नया इक्विटी रेगुलेशंस क्या भारतीय संविधान के विपरीत है? इस बात की जांच अब सुप्रीम कोर्ट करेगा. सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कुछ अपीलकर्ताओं ने यह शिकायत दर्ज कराई थी कि यूजीसी के नये नियम सामान्य जाति के खिलाफ हैं, उन अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फिलहाल नये नियमों पर रोक लगा दी है और 2012 के नियमों को ही जारी रखा है.

UGC New Regulations : यूजीसी के नए नियम पर सर्वोच्च न्यायालय ने तत्काल प्रभाव से रोक लगाया और कहा है कि फिलहाल 2012 के नियम ही प्रभाव में रहेंगे. इतना ही नहीं कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि नियमों में कुछ अस्पष्टता है जिसकी वजह से इसका बेजा इस्तेमाल हो सकता है. सर्वोच्च न्यायालय ने यूजीसी और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूरे मामले की सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख तय किया है.

नये नियमों पर क्या थी आपत्ति?

यूजीसी के नये नियमों पर सामान्य जाति के लोगों ने आपत्ति जताई थी और कहा था कि यह भेदभाव पूर्ण है और इसका गलत इस्तेमाल सामान्य श्रेणी के छात्रों के खिलाफ किया जा सकता है. दरअसल यूजीसी ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी की आत्महत्या के बाद संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को मिटाने के लिए नये नियम 13 जनवरी को जारी किये थे, जिसमें एससी–एसटी के साथ ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं को शामिल किया था. इस नियम का उद्देश्य हाशिए पर रहने वाले लोगों को जाति आधारित भेदभाव से बचाना था. लेकिन जेनरल कैटगरी के लोगों ने इसे भेदभाव पूर्ण बताया, क्योंकि इस नियम में गलत शिकायत दर्ज करने वालों के लिए किसी भी तरह की सजा का कोई प्रावधान नहीं किया गया है. जेनरल कैटेगरी के लोगों ने यूजीसी के नये नियमों के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किया और इन नियमों को जेनरल कैटेगरी की प्रताड़ना का जरिया तक बताया.

यूजीसी एक्ट 2012 में खास क्या है?

यूजीसी ने 2012 में संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को मिटाने के लिए एक नया कानून बनाया था, जिसके तहत एससी–एसटी वर्ग से आने वाले लोगों को जाति आधारित भेदभाव से बचाने के लिए नियम बनाए गए थे. इस नियम का उद्देश्य अनुशासन कायम करना है, ताकि जातिगत भेदभाव ना हो. यह नियम बहुत सख्त नहीं थे और इसमें गलत शिकायत करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई और दंड का प्रावधान था.

यूजीसी के नये नियमों पर कहां हो रही है सुनवाई?

यूजीसी के नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जाॅयमाल्या बागची की बेंच सुनवाई कर रही है. यूजीसी के नये नियमों के खिलाफ मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान कोर्ट गए हैं और इन नियमों को जेनरल कैटेगरी के लोगों के खिलाफ भेदभाव पूर्ण बताया है. कोर्ट ने यह स्पष्ट कहा है कि नये नियमों पर रोक इसलिए लगाई जा रही है ताकि इसकी संवैधानिकता की जांच हो. कोर्ट इस बात को देखेगा कि क्या नये नियमों में संविधान के खिलाफ कुछ भी है या नहीं, उसके बाद ही यह नियम लागू हो पायेंगे या यह भी संभव है कि इसमें कुछ संशोधन हो.

नए नियम में सुप्रीम कोर्ट क्या जांच करेगा?

सुप्रीम कोर्ट, यूजीसी के नये नियमों की जांच करेगा और यह देखेगा कि क्या नियम जाति, धर्म और लिंग के आधार पर किसी तरह का कोई भेदभाव तो नहीं कर रहा है. इसकी वजह यह है कि संविधान में इस तरह के भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 15(5) के तहत SC/ST/OBC के लिए विशेष प्रावधान करने की स्वतंत्रता राज्य को है. सुप्रीम कोर्ट यह भी देखेगा कि नये नियम कहीं किसी खास जाति के खिलाफ भेदभाव पूर्ण तो नहीं हैं.

देश की कमाई का ब्यौरा आज, संसद में पेश करेंगी निर्मला सीतारमण

Budget 2025-26: संसद के बजट सत्र में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण इकोनॉमिक सर्वे पेश करेंगी. 65 दिनों के इस सत्र के शेड्यूल से लेकर, नए बिल और देश की आर्थिक सेहत का पूरा लेखा-जोखा हमने आपके सामने लाने की कोशिश की है.


Economic Survey: भारतीय पॉलिटिक्स और इकॉनमी के लिए एक बड़ा दिन है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 पेश करने वाली हैं. बीते साल हमारे देश की कमाई और खर्च का हिसाब-किताब पर आधारित यह डॉक्यूमेंट हमें बताता है कि बीता साल कैसा रहा और आने वाले साल में हमारी इकोनॉमी किस दिशा में जाने वाली है. चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर की देखरेख में तैयार यह डॉक्यूमेंट देश की फाइनेंशियल हेल्थ का असली आईना होता है.

संसद में सबसे पहले क्या ?

दिन की शुरुआत क्वेश्चन ऑवर यानी प्रश्नकाल से होगी, जहां सांसद अपनी बात रखेंगे और मंत्रियों से तीखे सवाल पूछेंगे. इसके बाद मंत्रियों द्वारा जरूरी कागजात सदन के सामने रखे जाएंगे. निर्मला सीतारमण फाइनेंस मिनिस्ट्री से जुड़े पेपर्स पेश करेंगी, तो वहीं मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर सिविल एविएशन मुरलीधर मोहोल एयरपोर्ट अथॉरिटी (AERA) की वर्किंग रिपोर्ट और उससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स टेबल करेंगे.

कुछ नए कानून भी सामने आएंगे

आज एक बहुत ही जरूरी काम होने वाला है. संसद के पिछले सेशन में जो आठ बिल पास हुए थे और जिन पर राष्ट्रपति की मुहर लग चुकी है, उन्हें आज फॉर्मली सदन के सामने रखा जाएगा. इसके अलावा, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की 13वीं रिपोर्ट भी किरण रिजिजू और कोडिकुनिल सुरेश द्वारा पेश की जाएगी. साथ ही, ‘रूल 377’ के तहत सांसद उन मुद्दों को उठाएंगे जो जनता के लिए बहुत जरूरी हैं.

क्या है बजट सत्र का पूरा प्लान ?
यह बजट सत्र कल ही शुरू हुआ है और यह काफी लंबा चलने वाला है. कुल 65 दिनों के इस सफर में 30 बैठकें होंगी और यह 2 अप्रैल को खत्म होगा. बीच में 13 फरवरी से 9 मार्च तक ब्रेक भी रहेगा ताकि कमेटियां बजट की बारीकियों को अच्छे से चेक कर सकें.

UGC Bill: भाजपा नेता मनोज तिवारी का बड़ा बयान बोले जातिगत भेदभाव को रोकना चाहिए

भाजपा नेता और लोकसभा सांसद मनोज तिवारी ने जातिगत भेदभाव को रोकने की वकालत की है। अपने फेसबुक पेज़ पर उन्होंने लिखा कि भेदभाव को एकजुटता से रोका जाना चाहिए। ये काम साफ नियत से करना चाहिए, सियासी उल्लू सीधा करने के लिए नहीं। और नियम जाति के महीन पिरामिड को समझते हुए बनाए जाने चाहिए।

आपसी रंजिश में फंसाने वाले पर हो कार्रवाई

उन्होंने सुझाव दिया कहा कि सवर्ण छात्र अगर जातिगत भेदभाव करते हैं तो उनपर कार्रवाई हो,मगर उन्हें आपसी रंजिश में फँसाया जाए तो फँसाने वाले पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। क़ानून का दुरूपयोग नहीं होना चाहिए। अगर कोई OBC वर्ग का छात्र SC/ST वर्ग से भेदभाव करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान क्यों नहीं है? भेदभाव के मामले तो यहां भी होते हैं। मनोज तिवारी ने सवाल करते हुए पूछा कि नए नियमों में OBC वर्ग को भी पीड़ित पक्ष में रखा गया है, तो क्या Gen वर्ग को पहले से ही दोषी मान लिया गया है?

देश के लिए नासूर है जातिगत भेदभाव

    तिवारी ने आगे लिखा कि जातिगत भेदभाव देश के लिए नासूर है। ऐसे मामलों में दोषी के खिलाफ सख़्त सजा का प्रावधान होना चाहिए,मगर निर्दोष को बचने का अवसर भी मिलना चाहिए। 2012 में बने नियम में था कि अगर आरोप ग़लत निकले या फँसाने की मंशा निकली तो जुर्माना लगता था। नए नियम में क्यों नहीं है?

    हर जाति अपने से छोटी जाती खोज रही

    सांसद ने लिखा कि बाक़ी जाति का पिरामिड समझना है तो नियम बनाने वालों को गाँव में घूमकर समझना चाहिए। एसी कमरों में सिर्फ़ हवा ठंडी लगती है,जातिगत गर्माहट नहीं पता लगती।

    अंत में- परसाई जी,सच लिख गए हैं। इस देश में हर जाति ने अपने से छोटी जाति खोज रखी है।

    लव जिहाद पर योगी सख़्त, चेतावानी देते हुए कहा..

    Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लव जिहाद पर फ़िर से अपने संकल्प को दोहराया है कहा- बेटियों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने लव जिहाद, धर्मांतरण और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को लेकर भी चेतावनी दी है.


    Yogi Adityanath: सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने आमजन को लव जिहाद पर चेताया और कहा- समाज को जागरूक रहना होगा और इन साजिशों के खिलाफ संत समाज को भी आगे आना होगा. मुख्यमंत्री हरियाणा के सोनीपत जिले के मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम में नाथ संप्रदाय के मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा और आठ मान के भव्य भंडारा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

    धर्म की आड़ में सनातन धर्म को किया जा रहा कमजोर

    सीएम योगी ने कहा कि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने वाले कई कालनेमि सक्रिय हैं, जिनसे सतर्क रहने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. यदि कोई राष्ट्र के स्वाभिमान को चुनौती देता है, तो उसके विरुद्ध खड़ा होना ही सनातन परंपरा का धर्म है. उन्होंने कहा कि डेमोग्राफी बदलने की साजिश, अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद के नाम पर हो रहे गलत कामों को पूरी शक्ति और जागरूकता के साथ रोका जाएगा. 2009 में केरल हाईकोर्ट की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश के कई राज्यों में इसी प्रकार के संगठित षड्यंत्र दिखाई दे रहे हैं. संयुक्त परिवार की परंपरा कमजोर हो रही है, जिसे फिर से जिंदा करना जरूरी है.

    सनातन, राष्ट्र और समाज एक-दूसरे से अलग नहीं

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म केवल उपासना पद्धति नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग है. नाथ पंथ भारत की पुरानी आध्यात्मिक परंपराओं में से एक है, जिसने सदैव समाज को जोड़ने और राष्ट्र को दिशा देने का काम किया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक भारत-श्रेष्ठ भारत की कल्पना साकार हो रही है. आजादी के अमृत काल में भारत फिर से अपने वैभव की ओर अग्रसर है. सनातन धर्म मजबूत होगा तो विश्व मानवता के कल्याण का मार्ग भी मजबूत होगा.

    आस्था, विकास और सुरक्षा का संगम

    मुख्यमंत्री ने अयोध्या, काशी और प्रयागराज के उदाहरण देते हुए कहा कि आज धार्मिक स्थलों पर रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं. यह सब सुरक्षित, व्यवस्थित और भयमुक्त वातावरण में हो रहा है. प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया, जो इसका प्रमाण है. यह संख्या कई देशों की जनसंख्या से अधिक है.

    अगले एक हजार साल भारत और सनातन धर्म के

    सीएम योगी ने कहा- अगले एक हजार साल भारत और सनातन धर्म के होंगे. इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा. युवाओं को नशे से बचाना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है. सीमा पार से आने वाला ड्रग देश को कमजोर करने की साजिश है. समाज को इसके विरुद्ध संगठित होकर खड़ा होना होगा. मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण, नदियों की पवित्रता और सरस्वती नदी के पुनर्जीवन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण भी सनातन चेतना का अभिन्न अंग है. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवन-आरती की और आयोजकों को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं. कार्यक्रम में संत समाज, जनप्रतिनिधियों और देशभर से आए श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति रही.

    बिहार भवन को लेकर राज ठाकरे और बीजेपी-जदयू आमने सामने, जानें क्या है पूरा मामला

    मुंबई की जमीन पर बिहार भवन बनेगा बनाए जाने के प्रस्ताव को महाराष्ट्र और बिहार सरकार धरातल पर लाने की कोशिश में हैं लेकिन अब इस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं वज़ह हैं मनसे प्रमुख राज ठाकरे। राज ठाकरे ने बिहार भवन पर धमकी देकर दो राज्यों की राजनीति को आमने-सामने ला खड़ा किया है. न केवल मनसे बल्कि शिवसेना के विरोध ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। वहीं जदयू और भाजपा ने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र में हर हाल में बिहार भवन बनेगा.

    देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में बिहार भवन के निर्माण को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शिवसेना(उद्धव) ने इस प्रोजेक्ट का खुलकर विरोध करते हुए कहा है कि वे बिहार भवन नहीं बनने देंगे. इसके जवाब में जदयू और भाजपा ने दोनों दलों पर तीखा हमला बोला है और चेताया है कि हुल्लड़बाजी छोड़कर शांत रहें, क्योंकि मुंबई में बिहार भवन बनकर रहेगा. बिहार सरकार की इस प्रोजेक्ट ने अब स्थानीय राजनीति और केंद्र-राज्य व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

    बिहार भवन के विरोध में मनसे-शिवसेना

    मनसे नेता यशवंत किल्लेदार ने कहा कि बिहार सरकार को 314 करोड़ रुपये मुंबई में इमारत बनाने पर खर्च करने के बजाय बिहार के अस्पतालों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना चाहिए, ताकि वहां के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में न जाना पड़े. उनका कहना है कि यह पैसा बिहार की जनता की बुनियादी जरूरतों पर लगना चाहिए.
    उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी. पार्टी नेता विनायक राउत ने बिहार भवन को लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बोझ और स्थानीय राजनीति से प्रेरित कदम बताया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुंबई की जमीन को हड़पने का सिलसिला शुरू हो गया है और कल को बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में गुजरात भवन भी बन सकता है. शिवसेना का तर्क है कि मुंबई पहले से ही जमीन और रिसोर्स की कमी के दबाव से जूझ रही है.

    जदयू- भाजपा का पलटवार

    जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मनसे और शिवसेना के विरोध को उपद्रवी और हुल्लड़बाज राजनीति करार दिया. उन्होंने कहा कि ये दल अपने राजनीतिक फायदे के लिए संवेदनशील और सतही मुद्दों को उछालते रहते हैं.
    उनका साफ कहना है कि बिहार भवन का फैसला महाराष्ट्र और बिहार सरकार की आपसी सहमति से हुआ है और किसी की गीदड़ भभकी से यह परियोजना रुकेगी नहीं.
    वहीं भाजपा ने इस विरोध को संकीर्ण सोच और स्थानीय राजनीति का उदाहरण बताया. प्रदेश प्रवक्ता प्रभाकर मिश्र ने कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और यहां बिहार भवन का निर्माण बिहार के श्रमिकों, छात्रों और कारोबारियों के लिए बेहद उपयोगी होगा.
    उन्होंने कहा कि भाजपा एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना में विश्वास करती है और इस तरह की सकारात्मक पहल को निगेटिव राजनीति नहीं रोक सकती.

    कैंसर मरीजों के लिए बड़ी सुविधा

    बिहार भवन दक्षिण मुंबई के एलफिंस्टन एस्टेट में, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर बनेगा. इसके लिए बिहार सरकार ने 314.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है. यह 30 मंजिला इमारत होगी, जिसमें कैंसर मरीजों और उनके परिजनों के लिए 240 बेड की डॉरमेट्री बनाई जाएगी. बिहार फाउंडेशन (मुंबई) के अध्यक्ष कैसर खालिद के अनुसार, यह भवन बिहार में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने की योजनाओं का भी केंद्र बनेगा.
    भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने बताया कि इमारत में एसटीपी, ग्रीन एरिया और सोलर पैनल जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल होगी. बिहार सरकार का कहना है कि दिल्ली, यूपी, तमिलनाडु, तेलंगाना और गुजरात की तरह मुंबई का बिहार भवन भी सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में काम करेगा.